Tuesday, 11 October 2016

रावण बनना भी कहां आसान...

रावण बनना भी कहां आसान.

रावण बनना भी कहां आसान.

रावण में ज्ञान और विद्वता का अम्बार था लेकिन उसका दुरुपयोग करने का संस्कार नहीं था
रावण में अहंकार था, तो पश्चाताप भी था
रावण में ज्ञान और विद्वता का शक्ति थी तो एक मनुष्य जैसे बच्चे के सामान ज़िद भी थी
रावण की सोच अगर सामान्य होती तो वह एक व्यक्ति होता वह देवतुल्य था क्योंकि वह दस अलग दिमाग से, (दशानन) दस अलग अलग परिप्रेक्ष्य से सोच सकता पर इस सोच को सच्चाई से बताने का सहस भी था
रावण में अपने को श्रेष्ठ कहने की क्षमता थी तो अपने नश्वर होने का एहसास भी था
रावण शक्ति का प्रतीक था उसका प्रतिबिम्ब था पर उसे अपने लोगों से कमज़ोर भी था
रावण में सोने की नगरी बनाने का सृजन था वैभव को प्रतिलक्षित करने का मन था तो तपस्या करने की और वैभव से अलग रहने की दृढ़ता भी थी
रावण में वासना थी, तो संयम भी था
रावण में सीता के अपहरण की ताकत थी, तो बिना सहमति पराए स्त्री को स्पर्श न करने का संकल्प भी था
सीता जीवित मिली ये राम की ताकत थी, पर पवित्र मिली ये रावण की मर्यादा थी
राम,
तुम्हारे युग का रावण अच्छा था..
दस के दस चेहरे, सब "बाहर" रखता था..
महसूस किया है कभी उस जलते हुए रावण का दुःख
जो सामने खड़ी भीड़ से बार बार पूछ रहा था.....
"तुम में से कोई राम है क्या?"